राजनांदगांव :- राजनांदगांव में मानसून की दस्तक से पहले नगर निगम की तैयारियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने महापौर मधुसूदन यादव के नेतृत्व वाले निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मानसून पूर्व तैयारियां केवल कागजों और दावों तक सीमित हैं। उन्होंने दावा किया कि बारिश शुरू होते ही निगम की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ जाएगी और छत्तीसगढ़ी कहावत ढोल तरी पोल, मसाला तरी अंधियार पूरी तरह चरितार्थ होगी।
श्री पिल्ले ने शहर में मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महापौर मधुसूदन यादव के नेतृत्व में नगर निगम द्वारा किए जा रहे तैयारियों के दावे पूरी तरह हवा-हवाई हैं। निगम प्रशासन मानसून को लेकर जितने भी दावे कर रहा है उनकी वास्तविकता पहली तेज बारिश के साथ ही जनता के सामने आ जाएगी। श्री पिल्ले ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में नालियों की सफाई अधूरी है जल निकासी व्यवस्था कमजोर बनी हुई है और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में अब तक कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है। इसके बावजूद निगम प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी दो-चार दिनों में मानसून के सक्रिय होते ही निगम की तैयारियों की पोल खुल जाएगी। उस समय छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कहावत "ढोल तरी पोल, मसाला तरी अंधियार" पूरी तरह सही साबित होगी। अभी जो व्यवस्थाएं कागजों में दुरुस्त दिखाई जा रही हैं, वे जमीनी स्तर पर नाकाफी साबित होंगी। उन्होंने ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन ने समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। यदि बारिश के दौरान शहर में जलभराव, बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेयजल संकट या सफाई व्यवस्था चरमराने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी। श्री पिल्ले ने कहा कि जब बारिश के बीच आम नागरिक परेशान होंगे और मूलभूत सुविधाओं के लिए निगम कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर होंगे तब प्रशासन को अपनी कमियों और लापरवाही का एहसास होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होने वाली है बल्कि व्यवस्थाओं का वास्तविक आकलन जमीनी स्थिति के आधार पर करेगी। उन्होंने निगम प्रशासन से मानसून शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने, नालों और नालियों की व्यापक सफाई सुनिश्चित करने तथा जलभराव और अन्य समस्याओं से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग की है।